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Saturday, 17 October 2015

कैलाश मानसरोवर यात्रा ----तेइसवाँ दिन-----धारचूला से पिथौरागढ़



सुबह 5 बजे मेरी नींद खुल गई प्रायः सभी यात्री जाग गए थे एवं आगे की यात्रा की तैयारी कर रहे थे। फिर नहाने की तैयारी किया। थोड़ी देर में स्नान भी कर लिया। सुबह-सुबह हल्की ठण्ड लग रही थी। किन्तु नहाने के बाद अच्छा भी लग रहा था। यात्रियों के लिए गेस्ट हाऊस कैम्पस में बस खड़ी हुई थी। जिसमें सामान भी लद चुका था। डायनिंग हाल में आकर नाश्ता किया और चाय ली।

नाश्ता करके हमने देखा कि कुछ यात्री रिसेप्शन-काऊंटर पर कुछ खरीददारी कर रहे थे, हम भी वहाँ पहुँच गए और कुमाऊँ के दर्शनीय-स्थलों के कुछ पोस्टर्स खरीद लिए। भोले के जयकारे लगाए और आते समय की तरह ही अपनी-अपनी बस में बैठ गए। लगभग 8 बजे ‘‘ओम नमः शिवाय” के उद्घोष के साथ हमारी बस गेस्ट हाऊस से रवाना हुई।

बस काली नदी के किनारे चलती हुई मिरथी की ओर जा रही थी। हम मिरथी जाते समय एक दोराहे पर पहुँच गए। जहाँ से मिरथी जाने वाली सड़क पर ITBP की लाल झंडा लगी जीप खड़ी थी। वह जीप हमें लेने आयी हुई थी। हमारे ड्राइवर को अपने पीछे आने का इशारा करके आगे-आगे चलने लगी।

हम मिरथी के ITBP बेस कैंप में प्रवेश कर गए। गेट से ही रिसीव करने के लिए रास्ते के दोनों ओर सिपाही पंक्तिबद्ध होकर खड़े थे तो कमांडर इन चीफ़ स्वयं स्वागत के लिए उपस्थित थे।

फिर पास ही बने एक भवन में हमें ले जाया गया। उक्त भवन के गेट के पास ही कुछ फोटोग्राफ्स लगे हुए हैं। जिसे यात्रीगण बड़े ही चाव से देख रहे थे। जिसमें हमारी कैलाश मानसरोवर यात्रा में जाते समय लिए गये स्वागत-सत्कार के फोटोग्राफस के अलावा सामूहिक फोटोग्राफ्स भी है। यात्रियों के लिये यहां चाय - नाश्ता का इंतजाम आईटीबीपी के द्वारा किया गया है। सभी यात्री यहां नाश्ता का आनन्द लिए, नाश्ता उपरांत हमें हाल में बिठाया गया। जहां सभी यात्रियों को कैलाश यात्रा एवं यात्रा के दौरान आईटीबीपी जवानों के द्वारा दी गई सहायता या असहयोग के बारे में फीड बैक देने हेतु फार्म दिया गया। जिसे भरकर वही जमा किए। तत्पश्चात उसी कक्ष में प्रत्येक यात्री को समूह फोटो वितरित किया गया।

वह से हम पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुए। रास्ते में एक जगह लैंड स्लाइड की वजह से एक पेड सड़क पर गिरा हुआ था। काफी टाइम हमारा वही पर ख़राब हो गया। 4 बजे तक हम पिथौरागढ़ पहुंच गये। बड़ा ही मनोरम स्थान है और कुमाऊ मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस एक छोटी सी पहाड़ी पर है। वहाँ पहुँचते ही हमें बुरांश का शरबत मिला। पिथौरागढ़ में रूम काफी अच्छा था। कुछ देर आराम करने के बाद हम वहाँ बाजार घूमने गए। हमारे गेस्ट हाउस के साथ ही पहाड़ी पर उल्का देवी का मंदिर था। रात को खाना खा कर अपने अपने रूम में सोने चले गए। 
मैं और बंसल जी 

धारचूला होटल में कोचर जी के साथ 





मिर्थी में 




मस्ती करते हुए 



पिथौरागढ़ 


प्रवेश द्वार उल्का माता मंदिर का 




गेस्ट हाउस का रिसेप्शन 



 
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