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Sunday, 26 July 2015

कैलाश मानसरोवर यात्रा ………चौथा दिन .......दिल्ली से अल्मोड़ा तक बस से ( वाया काठगोदाम , भीमताल )===340 KM


देर रात तक पैकिंग चलती रही। नींद  तो बिलकुल भी नहीं आ रही थी। मन में एक डर भी था कि क्या मैं ये कठिन यात्रा पुरी कर पाऊगा? सुबह जल्दी तैयार हो कर जीजा जी के साथ गुजरात समाज सदन  की तरफ निकल पड़ा। वहां पहुँच कर मैंने देखा सभी ने अपने अपने बैग तो पॉलीथिन वाले बड़े बैग में डाल रखे हैं। मैंने भी पोलिथिन वाले २ बैग लिए और अपने बैग को उसमे डाल कर उसे अच्छे से बाँध दिया और उन बैग पर अपना नाम लिख दिया। 

गुजराती समाज सदन में ब्रम्ह मुहुर्त से ही हलचल प्रारंभ हो गयी, इस के बाद  मै उदय कौशिक जी के कमरे में आ गया जहा शिव स्तुति रही थी। मैंने हवन एवं आरती कर के प्रसाद ग्रहण किया कौशिक जी ने आशीवार्द स्वरूप सभी को मालायें  पहना कर शुभ मंगल यात्रा एवं दर्शनों की कामना की।
 
तब तक वॉल्वो बस  आ गई गई थी सब यात्रियों ने अपने अपने बैग गुजरती समाज सदन के गेट के पास रख दिया जहाँ पर मैंने और अभिषेक ने सारे सामान को नोट कर के ट्रक में रखवा दिया। हमारे एल.ओ. साहब भी आ गये थे, सभी यात्री बाहर गेट पर आ गए थे। सभी यात्रियों को ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखे पटके और माला भेंट में मिलीं।

सभी ने उच्च स्वर में भगवान शिव का जयजयकार किया और बस में बैठ गए। अभी चार पांच यात्री रह गए थे। उन्हें टेम्पो ट्रैवलर में बिठाया गया उन चार पांच यात्रियों में मैं भी एक था।  हमारी मिनी बस दिल्ली  की सड़को से घूमते हुए गाज़ियाबाद के जीटी रोड पर बने बड़े हॉल के आगे रुकी। हमारी बोल्वो बस हम से पहले पहुँच चुकी थी।  सब लोग हमारा इन्तजार कर रहे थे।  सामने गाज़ियाबाद मानसरोवर सेवा समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्य हमारे स्वागत में फूलों की मालाएं लेकर खड़े थे। सभी को मालाएं पहनायी गयीं और भगवान शिव के ध्यानस्थ रुप के चित्र वाला पेंडेंट लगी मालाएँ भेंट दी गयीं।


मंच सजाया हुआ था। एलओ साहब मुख्य आतिथि थे।  उनका विशेष स्वागत हुआ। लंबा सफ़र होने के कारण सभी तीर्थयात्रियों को अतिशीघ्र जलपान समाप्त करके बस में बैठने को कहा गया। गाज़ियाबाद के आतिथ्य-सत्कार के लिए धन्यवाद और आभार प्रकट करते हुए बस में जा बैठे। 

दोपहर को हम काठगोदाम कुमाऊँ-मंडल के अतिथि-गृह में पहुँच गए।  स्त्रियाँ  हाथ में थाल सजाए स्वागत के लिए खड़ी थीं। सभी तीर्थ-यात्रियों के तिलक लगाया गया और माला पहनायी गयीं। वहाँ स्थानीय अखबारों के और लोकल  टीवी चैनलों के पत्रकार  खड़े थे जिन्होंने सभी तीर्थयात्रियों के सामूहिक फोटो लिए और कुछ से बातचीत भी रिकॉर्ड की। काठगोदाम की दिल्ली से दूरी 280 KM के लगभग है। 


वही दोपहर का भोजन किया। सब पुनः चलने को तैयार थे। यहाँ से  मिनी बस से जाना होता है दो बसों में सभी यात्री जा के बैठ गए। लगभग 22 KM के बाद हमारी बस भीमताल के पास गीताधाम के लोक संग्रह पर रुकी।  एक तरह से ये एक म्यूजियम और आर्ट गैलरी थी।  जो बहुत ही अच्छी थी।

लोक संस्‍कृति  संग्रहालय 

लोक संस्कृत संग्रालय एक प्राइवेट संग्रालय है जिसे Dr. Yashodhar Mathpal ने 1983 में स्थापित किया था। Dr. साहिब एक पुरातत्व, क्यूरेटर, पेंटर, दार्शनिक हैं।  उन्होंने फाइन आर्ट्स में लखनऊ से डिप्लोमा, ड्राइंग और पेंटिंग में मास्टर डिग्री और पुरातत्त्व में P.hd की है। उन्होंने फ्रांस, इटली, इंग्लैंड, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया और भारत के कई जगहों पर पेंटिंग की प्रदर्शन आयोजित की हैं। पर्यटक यहां आकर तस्‍वीरों के विशाल संग्रह के साथ - साथ कीमती कलाकृतियों को भी देख सकते हैं। इस संग्रहालय में उत्‍तराखंड की समृद्ध संस्‍कृति को दर्शाने वाली विभिन्‍न पुरातात्विक वस्‍तुओं और रॉक कला का भी उम्‍दा कलेक्‍शन है। पर्यटक यहां आकर लोक चित्रों, लकड़ी की कलाकृतियों, प्राचीन पांडुलिपियों, भगवान और देवी की छवियों, कृषि के औजारों और वेशभूषा को भी देख सकते हैं।

Dr. Yashodhar Mathpal

 
फिर हमारी बस  कैंची-धाम में नीब  करोरी बाबा के आश्रम / मंदिर में रुकी।  सभी ने अंदर जा कर दर्शन किया। मौसम बहुत ही अच्छा था। 

कैंची - धाम आश्रम 

कैंची धाम में आश्रम की स्थापना नीब करोरी बाबा ने 1965 में की थी। बाबा जी हिन्दू देवता हनुमान जी के भक्त थे।  1958 में उन्होंने अपना घर त्याग दिया। उसके बाद वो लगातार नार्थ इंडिया में साधु की तरह घूमे। इस समय वो अलग अलग नामों जैसे लक्ष्मण दास, हांड़ी वाला बाबा , तिकोनी बाबा से प्रसिद्ध हुए। जब वो बावणिआ गुजरात में साधना करते रहे तो वहां पर वो तलैया बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। वृन्दाबन में वे चमत्कारी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं। इन के बहुत सारे भक्त इंडिया से बाहर भी हैं।  जो इन्हे नीब करोरी बाबा और महाराजजी के नाम से जानते हैं। इन के बहुत सारे आश्रम इंडिया में और इंडिया से बाहर भी हैं। इन की मृत्यु 11 सितम्बर 1973 में वृन्दावन में हुई। हर साल 15 जून को यहाँ पर विशाल भंडारा होता है जिस में एक लाख के करीब लोग भंडारा ग्रहण करते हैं। 


Neeb Karori Baba ji

शाम  होते होते हम अल्मोड़ा मे  K.M.V.N  के गेस्ट हाउस में पहुंच गये। गेस्ट हाउस थोड़ा उचाई पर था। सारा दिन बस में बैठे बैठे टाँगे जाम हो गई थी। यहाँ आ कर एल ओ साहिब ने फनी कुमार  की ड्यूटी लगा दी कि वो सब को कमरे की चाबी अलॉट कर दे। सभी यात्रियों को कमरे की चाबी दे दी गई।  एक कमरे में तीन तीन यात्रियों के ठहरने का इंतजाम था। थोड़ी देर में खाना खाया, खाने से पहले एल ओ साहिब ने अगले दिन की यात्रा के बारे में बताया।  खाना खाने के बाद सभी यात्री अपने अपने कमरो में चले गए।  खाने के बाद एल .ओ साहब मै, वर्मा जी, कोचर जी, विपुल गेस्ट हाउस के पार्क में कुर्सी लगा कर बैठ गए और आपस में बातचीत की।  बाहर  का मौसम बहुत ही सुहाना था। कुछ देर बाद हम सब अपने कमरों में चले गए। 

इस यात्रा को आरम्भ से पढने के लिये यहाँ क्लिक करें। 


सामान की गिनती कर के ट्रक में रखते हुए। 
चलने से पहले 
 
गाज़ियाबाद समिति द्वारा हाल में स्वागत 












संग्रालाय के अंदर का दृश्य 

संग्रालाय के अंदर का दृश्य 



नीब करोरी बाबा आश्रम 
 
अल्मोड़ा में रात को होटल के बाहर गप - शप करते हुए। 

 

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